Thursday, 18 February 2016

29 हजार रुपये का iPhone 5S सिर्फ 68 रुपये में!

नई दिल्ली : चौंकिए नहीं! यह पक्की खबर है। 29 हजार रुपए का iPhone 5S सिर्फ 68 रुपए में। यह सौदा ई-कामर्स वेबसाइट स्नैपडील के साथ पंजाब के एक छात्र ने की है। 
स्नैपडीप से हुई इस डील के बारे में पंजाब यूनिवर्सिटी के बीटेक छात्र निखिल बंसल ने बताय, 'स्‍नैपडील की वेबसाइट पर आईफोन पर 99.7 फीसदी ऑफ का ऑफर देखते ही हमने तुरंत उसे ऑर्डर कर दिया। आईफोन 5एस के लिए 12 फरवरी 2015 को 68 रुपए में ऑर्डर किया और इंतजार किया। काफी समय तक इंतजार करने के बाद भी ऑर्डर डिलीवर नहीं हुआ।' ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि यह एक तकनीकी खराबी थी, न कि स्नैपडील की ओर से दिया जाने वाला किसी तरह का डिस्‍काउंट। तर्क दिया गया कि तकनीकी कारणों से वेबसाइट पर इस तरह का ऑफर दिखने लगा था, जिसे बाद में हटा दिया गया था।
स्नैपडील के जवाब से नाखुश निखिल ने आईफोन 5एस के लिए उपभोक्ता कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में उसने बताया कि स्नैपडील ने अपने ऑफर पर लिखा था कि आईफोन 5एस 99.7 प्रतिशत की छूट पर दिया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक यह 16 जीबी का फोन उसकी सभी खूबियों के साथ दिया जाएगा।

कोर्ट में स्नैपडील की ओर से कहा गया कि तकनीकी कारणों से यह ऑफर वेबसाइट पर दिख रहा था। उसे तत्काल हटा लिया गया। कोर्ट ने स्नैपडील के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि निखिल को आईफोन 5एस 99.7 प्रतिशत की छूट के साथ दिया जाए। साथ ही कोर्ट ने स्नैपडील पर 2000 रुपए का जुर्माना भी ठोंका।
उपभोक्ता कोर्ट के आदेश के खिलाफ स्नैपडील ने ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। लेकिन वहां भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी। कोर्ट ने अपना फैसला दोहराया और इस बार स्नैपडील पर पांच गुना यानी 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
खबर ज़ी न्यूज़ हिंदी के सौजन्य से। 

विवादों में सबसे सस्ता स्मार्टफोन: बुकिंग रुकी, उठा सवाल-4100 का फोन 251 में कैसे?

दैनिक भास्कर  की खबर के मुताबिक :-दुनिया के सबसे सस्ते स्मार्टफोन Freedom 251 की लॉन्चिंग के बाद गुरुवार सुबह इसकी वेबसाइट पर प्री-बुकिंग शुरू हुई। लेकिन कई यूजर्स ऑर्डर प्लेस नहीं कर पाए। कंपनी का दावा है कि साइट पर हर सेकंड 6 लाख हिट्स आ रहे थे। इस वजह से सर्वर क्रैश हुआ और बुकिंग 24 घंटे के लिए रोक दी गई। यह स्मार्टफोन अपनी कॉस्ट के चलते भी विवादों में है। सेल्युलर एसोसिएशन ने जांच की मांग की है। यह सवाल उठाया है कि 4100 रुपए का फोन 251 रुपए में कैसे मिल सकता है?क्या हैं इस स्मार्टफोन से जुड़े तीन विवाद...

- यह स्मार्टफोन नोएडा की रिंगिंग बेल्स ने लॉन्च किया है। 30 जून से कंपनी इसकी शिपिंग शुरू कर देगी।
- 251 रुपए के इस स्मार्टफोन के लिए कंपनी ने वेबसाइट से प्री-बुकिंग 18 फरवरी सुबह 6 बजे से शुरू की थी। यह 21 फरवरी शाम 8 बजे तक होनी है।
- हालांकि, गुरुवार सुबह यूजर्स ने वेबसाइट के शुरुआती कुछ घंटे तक क्रैश होने और बाद में ऑर्डर प्लेस नहीं हो पाने की शिकायत की।
- इसके बाद कंपनी ने एक मैसेज पोस्ट किया। इसमें लिखा गया- हमें अभी एक सेकंड में 6 लाख हिट्स मिले। इसी के चलते सर्वर ओवरलोडेड हो गया। हम इसकी बुकिंग रोक रहे हैं। सर्विस अपग्रेड करने के बाद 24 घंटे के अंदर इसे दोबारा शुरू करेंगे।
विवाद 1 : लॉन्चिंग इवेंट में नहीं आए पर्रिकर
- 4 इंच एचडी डिस्प्ले, 1.3 गीगा हर्ट्ज प्रोसेसर और 1 जीबी रैम वाले 251 रुपए के इस फोन की लॉन्चिंग बुधवार को नोएडा में हुई।
- पर्रिकर इसकी लॉन्चिंग में नहीं आए। बीजेपी सांसद मुरली मनोहर जोशी इस इवेंट में शामिल हुए।
- मोबाइल इंडस्ट्री बॉडी इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन (आईसीए) का कहना है कि टेलिकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद को इस मामले की जांच करनी चाहिए।
- आईसीए का कहना है कि सब्सिडी पर सेल के बावजूद इस तरह के स्मार्टफोन की प्राइस 4100 रुपए से कम नहीं हो सकती।
- आईसीए ने इस सस्ते स्मार्टफोन के लॉन्चिंग इवेंट में सीनियर पॉलिटिकल और गवर्नमेंट लीडरशिप को मिले इनविटेशन और नेताओं की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए हैं।
विवाद 2 : इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन ने स्मार्टफोन की कीमत पर सवाल उठाए
- आईसीए ने कहा कि इस तरह के प्रोडक्ट की बिल ऑफ मटीरियल (बीओएम) वैल्यू 40 डॉलर यानी 2,700 रुपए आती है। यह कॉस्ट तभी आती है, जब इसे सस्ती सप्लाई चेन से खरीदा जाए।
- आईसीए के नेशनल प्रेसिडेंट पंकज महिंद्रू ने टेलिकॉम मिनिस्टर को लिखे लेटर में कहा कि रिटेल सेल्स के दौरान प्रोडक्ट कॉस्ट में ड्यूटी, टैक्स, डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल मार्जिन भी जुड़ते हैं। जब इस स्मार्टफोन की रिटेल कॉस्ट 4,100 रुपए बैठती है, तो यह 251 रुपए में कैसे बिक सकता है?
- महिंद्रू ने कहा कि यदि ऐसे फोन को ई-कॉमर्स या किसी तरह की सब्सिडाइज्ड सेल पर बेचा जाता है, तो इसकी कीमत 52-55 डॉलर यानी 3,500-3,800 रुपए बैठती है। 
- उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रोडक्ट पर सीधे कोई सब्सिडी नहीं मिली है, तो यह इतने कम रेट पर कैसे बिक सकता है?
- बता दें कि Samsung, Apple, Sony, Lava, Micromax, Karbonn, Motorola और HTC जैसी कंपनियां आईसीए की मेंबर हैं।
जवाब में रिंगिंग बेल्स ने क्या गणित बताया?
- रिंगिंग बेल्स के प्रेसिडेंट अशोक चड्ढा ने लॉन्चिंग इवेंट में कहा- "इस साल के आखिर तक हम फ्रीडम-251 स्मार्टफोन का हार्डवेयर भारत में बनाएंगे। बाद में इसे 100 पर्सेंट मेड इन इंडिया कर देंगे।"
- "हम इसके लिए नोएडा और उत्तराखंड में पायलट प्रोजेक्ट ला रहे हैं। इसकी कॉस्ट 500 करोड़ रुपए और टारगेट कैपिसिटी हर महीने 5 लाख यूनिट की होगी। ऐसे पांच मैन्युफैक्चरिंग सेंटर हम बनाएंगे। लेकिन शुरुआत में हम ढाई लाख ऑर्डर के बाद बुकिंग रोक देंगे।"
- "बिल ऑफ मटीरियल्स के हिसाब से इस स्मार्टफोन की कॉस्ट 2000 रुपए है। भारत में बनाकर हम इसमें से 400 रुपए बचा लेंगे।"
- "ऑनलाइन बेचकर हम इससे 400 रुपए और बचा लेंगे। अगर प्री-ऑर्डर पर नंबर बढ़ेगा तो हम 400 रुपए आैर सेव कर लेंगे।"
- "इसके बाद जब प्लैटफॉर्म बड़ा हो जाएगा तो हम ऐसे प्रोडक्ट्स हाईलाइट करेंगे, जो कस्टमर्स के लिए वैल्यूएबल होंगे।"
- "इससे हमारी सोर्स ऑफ इनकम बढ़ेगी। इसका फायदा हम कस्टमर्स तक पहुंचाएंगे और स्मार्टफोन की कॉस्ट को कंट्रोल करेंगे।"
- कंपनी का कहना है कि वह इस फोन के लिए कोई गवर्नमेंट सब्सिडी नहीं ले रही है, न ही प्रोजेक्ट में सरकार का कोई डिपार्टमेंट शामिल है।

विवाद 3 : आईफोन से कॉपी करने के दावे
- हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रीडम 251 में ज्यादातर बिल्ट अप आइकॉन्स आईफाेन जैसे दिखते हैं।
- इसका वेब ब्राउजर ऐप एप्पल के सफारी ब्राउजर जैसा नजर आता है जो आईफोन, आईपैड और मैक में होता है।
- इसमें राउंड होम बटन वैसा ही है, जैसा आईफोन में होता है।
- मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि फ्रीडम 251 दिल्ली की आईटी इम्पोर्टर कंपनी एडकॉम के एक हैंडसेट की तर्ज पर बना है। एडकॉम कंपनी का फ्रीडम 251 जैसा एक स्मार्टफोन कई ई-रिटेलर कंपनियों की वेबसाइट्स पर करीब 4000 रुपए में लिस्टेड है।
किसके लिए चैलेंज है यह फोन?
- रिंगिंग बेल्स का प्लान 500 रुपए से कम के और भी स्मार्टफोन मार्केट में उतारने का है। फि‍लहाल, मार्केट में मौजूद सबसे सस्ता स्मार्टफोन 1,500 रुपए के करीब है।
- पि‍छले साल डाटाविंड ने एलान कि‍या था कि‍ वह अनि‍ल अंबानी की रि‍लायंस कम्‍युनि‍केशन (आरकॉम) के साथ मि‍लकर दुनि‍या का सबसे सस्‍ता स्‍मार्टफोन 999 रुपए में लॉन्‍च करेगी। यह फोन अभी मार्केट में नहीं आया है।
- वहीं, इन्हें 4500 से 5000 रुपए के बीच आने वाले लेनोवो A2010 और कार्बन मैक वन टाइटेनियम के लिए भी चैलेंज माना जा रहा है।
- 251 रुपए वाले इस स्मार्टफाेन की स्क्रीन लेनेवाे (4.5 इंच) और कार्बन (4.7 इंच) से छोटी होगी, लेकिन 1.3 गीगा हर्ट्ज क्‍वाडकोर प्रोसेसर लगभग उतनी ही मजबूती देगा।
2,999 रुपए में 4-जी फोन लॉन्च कर चुकी है रिंगिंग बेल्स।
- हाल ही में रिंगिंग बेल्‍स ने 2,999 रुपए में 4-जी स्‍मार्टफोन को मार्केट में लॉन्च कि‍या था।
- इसके अलावा, मार्केट में कंपनी के दो फीचर फोन भी मौजूद हैं।
बुकिंग न होने से लोग नाराज, सोशल मीडिया पर निकाला गुस्सा...
- गुरुवार सुबह freedom251.com पर बुकिंग न होने पर यूजर्स ने अपना गुस्सा फेसबुक और ट्वीटर जैसी सोशल वेबसाइट पर निकाला। पढ़ें ट्वीट्स-

Vishal Upadhyay‏@VuVishal 
This might be a plan of our hon'ble PM narendra modi ji to wake up youths at early morning...
The Laughing Lama ‏@v4varmaji 
I have learnt a lesson today, money can't buy happiness and not even freedom, yeah
Mittal Patel ‏@mittalpatel 
The developers of http://freedom251.com has replaced Pay Now button with refresh button. All it does is refresh the page.
PIYUSH ‏@Iam_PRS
Thanks #Freedom251 , Now I will be able to tell My Grandchildren, that Your Grandfather Worked Hard to Get Freedom.
Alekhya Das ‏@iAlekhyaDas 
This is actually a great idea. They are taking all our money for 4 months. Bank Interest Bank Interest Bank Interest!
Vathsala ‏@Vaths52684
Succesfully Killed 50mins in refreshing.
⚡Prateek ⚡Shanatic ⚡ ‏@ShahidsSuperFan 
Hi Mom, Yes i wokeup for no reason. Just because Early to rise is good thing and want to help you in making Tea.
Lakshman ‏@lakshmanclassy
Keep on Refreshing. On the 251th Time. It will Open...

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत

हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article  मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की  probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी
. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr.Steve Pavlina ने लिखा है .

सूर्योदय  होने  से  पहले  उठाना  अच्छा  होता  है , ऐसी  आदत  आपको  स्वस्थ , समृद्ध  और  बुद्धिमान  बनती  है .
सुबह  उठने  वाले  लोग  पैदाईशी  ऐसे  होते  हैं  या   ऐसा  बना  जा  सकता  है ? मेरे  case में  तो  निश्चित  रूप  से  मैं  ऐसा  बना  हूँ . जब  मैं  बीस  एक  साल  का  था  तब  शायद  ही  कभी  midnight से  पहले  बिस्तर  पे  जाता  था . और  मैं  लगभग  हमेशा  ही  देर  से  सोता  था. और  अक्सर  मेरी  गतिविधियाँ  दोपहर  से  शुरू  होती  थीं .
पर  कुछ  समय  बाद  मैं  सुबह  उठने  और  successful  होने  के  बीच  के  गहरे  सम्बन्ध  को  ignore नहीं  कर  पाया , अपनी  life में  भी . उन  गिने  – चुने  अवसरों  पर  जब  भी   मैं  जल्दी  उठा  हूँ  तो  मैंने  पाया  है  कि  मेरी  productivity लगभग  हमेशा  ही  ज्यादा  रही  है , सिर्फ  सुबह  के  वक़्त  ही  नहीं  बल्कि  पूरे  दिन . और  मुझे  खुद अच्छा  होने  का  एहसास  भी  हुआ  है . तो  एक  proactive goal-achiever होने  के  नाते  मैंने सुबह  उठने  की  आदत  डालने  का  फैसला  किया . मैंने  अपनी  alarm clock 5 am पर  सेट  कर  दी …
— और  अगली  सुबह  मैं  दोपहर  से  just पहले  उठा .
ह्म्म्म…………
मैंने  फिर  कई  बार  कोशिश  की , पर  कुछ  फायदा  नहीं  हुआ .मुझे  लगा  कि  शायद  मैं  सुबह  उठने  वाली  gene के  बिना  ही  पैदा  हुआ  हूँ . जब  भी  मेरा  alarm बजता  तो  मेरे  मन  में  पहला  ख्याल  यह  आता  कि  मैं  उस  शोर  को  बंद  करूँ  और  सोने  चला  जून . कई  सालों  तक  मैं  ऐसा  ही  करता  रहा , पर  एक  दिन  मेरे  हाथ  एक  sleep research लगी  जिससे  मैंने  जाना  कि  मैं  इस  problem को  गलत  तरीके  से  solve कर  रहा  था . और  जब  मैंने  ये  ideas apply   कीं  तो  मैं  निरंतर  सुबह   उठने  में  कामयाब  होने  लगा .
गलत  strategy के  साथ  सुबह  उठने  की  आदत  डालना  मुश्किल  है  पर  सही  strategy के  साथ  ऐसा  करना  अपेक्षाकृत  आसान  है .
सबसे  common गलत  strategy है  कि  आप  यह  सोचते  हैं  कि  यदि  सुबह  जल्दी  उठाना  है  तो  बिस्तर  पर  जल्दी  जाना  सही  रहेगा . तो  आप  देखते  हैं  कि  आप  कितने  घंटे  की  नीद  लेते  हैं , और  फिर  सभी  चीजों  को  कुछ  गहनते  पहले  खिसका  देते  हैं . यदि  आप  अभी  midnight से  सुबह  8 बजे  तक  सोते  हैं  तो  अब  आप  decide करते  हैं  कि  10pm पर  सोने  जायेंगे  और  6am पर  उठेंगे .  सुनने  में  तर्कसंगत  लगता  है  पर  ज्यदातर  ये  तरीका  काम  नहीं  करता .
ऐसा  लगता  है  कि  sleep patterns को  ले  के  दो  विचारधाराएं हैं . एक  है  कि  आप  हर  रोज़  एक  ही  वक़्त  पर  सोइए  और  उठिए . ये  ऐसा  है  जैसे  कि  दोनों  तरफ  alarm clock लगी  हो —आप  हर  रात  उतने  ही  घंटे  सोने  का  प्रयास  करते  हैं . आधुनिक  समाज  में  जीने  के  लिए  यह  व्यवहारिक  लगता  है . हमें  अपनी  योजना  का  सही  अनुमान  होना  चाहिए . और  हमें  पर्याप्त  आराम  भी  चाहिए .
दूसरी  विचारधारा  कहती  है  कि  आप  अपने  शरीर  की  ज़रुरत  को  सुनिए  और  जब  आप  थक  जायें  तो  सोने  चले  जाइये  और  तब  उठिए  जब  naturally आपकी  नीद  टूटे . इस  approach की  जड़  biology में  है . हमारे  शरीर  को  पता  होना  चाहिए  कि  हमें  कितना  rest चाहिए , इसलिए  हमें  उसे  सुनना  चाहिए .
Trial and error से  मुझे  पता  चला  कि  दोनों  ही  तरीके  पूरी  तरह  से  उचित  sleep patterns नहीं  देते . अगर  आप  productivity की  चिंता  करते  हैं  तो  दोनों  ही  तरीके  गलत  हैं . ये  हैं  उसके  कारण :
यदि  आप  निश्चित  समय  पे  सोते  हैं  तो  कभी -कभी  आप  तब  सोने  चले  जायेंगे  जब  आपको  बहुत  नीद  ना  आ  रही  हो . यदि  आपको  सोने  में  5 मिनट  से  ज्यादा  लग रहे  हों  तो  इसका  मतलब  है  कि  आपको  अभी  ठीक  से  नीद  नहीं  आ  रही  है . आप  बिस्तर  पर  लेटे -लेटे अपना  समय  बर्वाद  कर  रहे  हैं ; सो  नहीं  रहे  हैं . एक  और  problem ये  है  कि  आप  सोचते  हैं  कि  आपको  हर  रोज़  उठने  ही  घंटे  की  नीद  चाहिए , जो  कि  गलत  है . आपको  हर  दिन  एक  बराबर  नीद  की  ज़रुरत  नहीं  होती .
यदि  आप  उतना  सोते  हैं  जितना  की  आपकी  body आपसे  कहती  है  तो  शायद  आपको  जितना  सोना  चाहिए  उससे  ज्यादा  सोएंगे —कई  cases में  कहीं  ज्यादा , हर  हफ्ते  10-15 घंटे  ज्यदा ( एक  पूरे  waking-day के  बराबर ) ज्यादातर  लोग  जो  ऐसे  सोते  हैं  वो  हर  दिन  8+ hrs सोते  हैं , जो  आमतौर  पर  बहुत  ज्यादा  है . और  यदि  आप  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  उठ  रहे  हैं  तो  आप  सुबह  की  planning सही  से  नहीं  कर  पाएंगे . और  चूँकि  कभी -कभार  हमारी  natural rhythm घडी से  मैच  नहीं  करती  तो  आप  पायंगे  कि  आपका  सोने  का  समय  आगे  बढ़ता  जा   रहा  है .
मेरे  लिए  दोनों  approaches को  combine करना  कारगर  साबित  हुआ . ये  बहुत  आसान  है , और  बहुत  से  लोग  जो  सुबह  जल्दी  उठते  हैं , वो  बिना  जाने  ही  ऐसा  करते  हैं , पर  मेरे  लिए  तो  यह  एक  mental-breakthrough था .Solution ये  था  की  बिस्तर  पर  तब  जाओ  जब  नीद  आ  रही  हो  ( तभी  जब  नीद  आ  रही  हो ) और  एक  निश्चित  समय  पर  उठो ( हफ्ते  के  सातों  दिन ). इसलिए  मैं  हर  रोज़  एक  ही  समय  पर  उठता  हूँ ( in my case 5 am) पर  मैं  हर  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  सोने  जाता  हूँ .
मैं  बिस्तर  पर  तब  जाता  हूँ  जब  मुझे  बहुत  तेज  नीद  आ  रही  हो . मेरा  sleepiness test ये  है  कि  यदि  मैं  कोई  किताब  बिना  ऊँघे  एक -दो  पन्ने  नहीं  पढ़  पाता  हूँ  तो  इसका  मतलब  है  कि  मै  बिस्तर  पर  जाने  के  लिए  तैयार  हूँ .ज्यादातर  मैं  बिस्तर  पे  जाने  के  3 मिनट  के  अन्दर  सो  जाता  हूँ . मैं  आराम  से  लेटता  हूँ  और  मुझे  तुरंत  ही  नीद  आ  जाति  है .  कभी  कभार  मैं  9:30 पे  सोने  चला  जाता  हूँ  और  कई  बार  midnight   तक  जगा  रहता  हूँ . अधिकतर  मैं  10 – 11 pm के  बीच  सोने चला  जाता  हूँ .अगर  मुझे   नीद  नहीं   आ  रही  होती  तो  मैं  तब  तक  जगा  रहता  हूँ  जब  तक  मेरी  आँखें  बंद  ना  होने  लगे . इस  वक़्त  पढना  एक  बहुत  ही  अच्छी activity है , क्योंकि  यह  जानना  आसान  होता  है  कि  अभी  और  पढना  चाहिए  या  अब  सो  जाना  चाहिए .
जब  हर  दिन  मेरा  alarm बजता  है  तो  पहले  मैं  उसे  बंद  करता  हूँ , कुछ  सेकंड्स  तक  stretch करता  हूँ , और  उठ  कर  बैठ  जाता  हूँ . मैं  इसके  बारे  में  सोचता  नहीं . मैंने  ये  सीखा  है  कि  मैं  उठने  में  जितनी  देर  लगाऊंगा ,उतना  अधिक  chance है  कि  मैं  फिर  से  सोने  की  कोशिश  करूँगा .इसलिए  एक  बार  alarm बंद  हो  जाने के  बाद  मैं  अपने  दिमाग  में  ये  वार्तालाप  नहीं  होने  देता  कि  और  देर  तक  सोने  के  क्या  फायदे  हैं . यदि  मैं  सोना  भी  चाहता  हूँ , तो  भी  मैं  तुरंत  उठ  जाता  हूँ .
इस  approach को  कुछ  दिन  तक  use करने  के  बाद  मैंने  पाया  कि  मेरे  sleep patterns एक  natural rhythm में  सेट  हो  गए  हैं . अगर  किसी  रात  मुझे  बहुत  कम  नीद  मिलती  तो  अगली  रात  अपने  आप  ही  मुझे  जल्दी  नीद  आ  जाती  और  मैं  ज्यदा  सोता . और  जब  मुझमे  खूब  energy होती  और  मैं  थका  नहीं  होता  तो  कम  सोता . मेरी  बॉडी  ने  ये  समझ  लिया  कि  कब  मुझे  सोने  के  लिए  भेजना  है  क्योंकि  उसे  पता  है  कि  मैं  हमेशा  उसी  वक़्त  पे  उठूँगा  और  उसमे  कोई  समझौता नहीं  किया  जा  सकता .
इसका  एक  असर ये हुआ कि  मैं  अब  हर  रात  लगभग  90 मिनट  कम  सोता  ,पर  मुझे  feel होता  कि  मैंने  पहले  से ज्यादा  रेस्ट  लिया  है . मैं  अब  जितनी  देर  तक  बिस्तर  पर  होता  करीब  उतने  देर  तक  सो  रहा  होता .
मैंने  पढ़ा  है  कि  ज्यादातर  अनिद्रा  रोगी  वो  लोग  होते  हैं  जो  नीद  आने  से  पहले  ही  बिस्तर  पर  चले  जाते  हैं . यदि  आपको  नीद  ना  आ  रही  हो  और  ऐसा  लगता  हो  कि  आपको  जल्द ही  नीद  नहीं  आ  जाएगी  , तो  उठ  जाइये  और  कुछ  देर  तक  जगे  रहिये . नीद  को  तब  तक  रोकिये  जब  तक  आपकी  body ऐसे  hormones ना  छोड़ने  लगे  जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर  आप  तभी  bed पे  जाएँ  जब  आपको  नीद  आ  रही  हो  और  एक  निश्चित  समय  उठें  तो  आप  insomnia का  इलाज  कर  पाएंगे .पहली  रात  आप  देर  तक  जागेंगे  , पर  बिस्तर  पर  जाते  ही  आपको  नीद  आ  जाएगी . .पहले  दिन  आप  थके  हुए  हो  सकते  हैं  क्योंकि  आप  देर  से  सोये  और  बहुत  जल्दी  उठ  गए , पर  आप  पूरे  दिन  काम  करते  रहेंगे  और  दूसरी  रात  जल्दी  सोने  चले  जायेंगे .कुछ  दिनों  बाद  आप  एक  ऐसे  pattern में  settle हो  जायेंगे  जिसमे  आप  लगभग  एक  ही  समय  बिस्तर  पर  जायंगे  और  तुरंत  सो  जायंगे .
इसलिए   यदि  आप  जल्दी  उठाना  चाहते  हों  तो  ( या  अपने  sleep pattern को  control करना  चाहते  हों ), तो  इस  try करिए :  सोने  तभी  जाइये  जब  आपको  सच -मुच  बहुत  नीद  आ रही  हो  और  हर  दिन  एक  निश्चित  समय  पर  उठिए .